कुभं मेला, जहाँ संगम किनारे देश विदेश से लाखों लोग भारतीय सनातन संस्कृती को करीब से देखते ही नही बल्कि महसूस भी करते है. कुंभ मेला मात्र मेला न होकर, प्रमाण है ईश्वर में विश्वास का, श्रद्धा का. वैसे तो इस मेले की अपनी कई सारी ख़ूबियाँ है लेकिन इस मेले का एक दृश्य ऐसा भी है, जिसे देखने के लिए विदेशी पर्यटक ही नही विदेशी मीडिया भी आतुर रहती है.

ये दृश्य है उस समुदाय का जिसके बारे में लोग अक्सर किससे-कहानियों में सुनते तो है पर वास्तिवक जीवन में कम ही लोग इसे देख, सुन, व इसका अनुभव कर पाते है. क्योकि ये वो समुदाय है जो समाज के उस हिस्से में रहता है, जहाँ कोई भी सामान्य व्यक्ति जाना पसंद नही करेगा.

शमशान जिनका घर हो, जिनके लिए भोजन के रूप में जानवर का हो या इंसान का “माँस” सब सामान्य है. वे गांजा पीते है और नशे में भी पूरे होश में रहते है. शिव के साधक, शक्ति के हैं पुजारी, जो सही गलत से हैं परे “अघोरी” कहती उनको दुनिया सारी.

भारत में अघोरी समुदाय हमेशा से एक रहस्मयी समुदाय के रुप में जाना गया है. अघोरी संप्रदाय को अक्सर समाज में अलग अलग विचारधाराओं से मापा गया है. अघोरियों का आसामाजिक ढंग से रहना कई बुद्घिजीवियों के लिए एक प्रकार की मानसिक विकृति है. लेकिन दर्शनशास्त्र के जानकर व इस विशेष क्षेत्र में अनुसंधान कर रहे है विशेषज्ञ इसे तंत्र मानते है जहाँ मानव चेतना से परे जा कर विभिन्न सिद्धियों के मालिक बनने के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है.

आखिर कौन है ये अघोरी और क्या है इनका इतिहास ?

विशेषज्ञों के अनुसार अघोरी संप्रदाय का इतिहास 18वी शताब्दी पुराना है. अघोरी संप्रदाय की कई प्रक्रियाएँ कापालिक संप्रदाय से मेल जोल खाती है. दूसरें शब्दो में कहा जाए तो इस संप्रदाय ने कापालिक संप्रदाय की तमाम चीजों को अपने जीवन में शामिल कर लिया है.

अगर आप कापालिक संप्रदाय को अच्छे से समझते है तो आप अघोरी संप्रदाय को भी अच्छे से समझ पाएगें ।
असल में भगवान शिव को मानने वालो को शैव कहते है. शैव साधुओं को नाथ, अघोरी, अवधूत, बाबा, औघड़, योगी, सिद्ध कहा जाता है. महाभारत में माहेश्वर यानि शैव के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं-

1. शैव
2. पाशुपत
3. कालदमन
4. कापालिक

कापालिक संप्रदाय के ईष्ट देव भैरव थे, इस संप्रदाय के लोग नर-कपाल में ही भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म मलते थे. हालांकि आज पूरी तरह से कापालिक संप्रदाय अस्तित्व में नही है पर उसकी कुछ झलक अघोरी संप्रदाय में दिखाई देती है.

अ+घोर यानी जो घोर (डरावना) नही हो जो सरल हो. अरोघी दर्शनशास्त्री कहते है कि आप तभी सरल बन सकते है जब आप घृणा को त्याग देगें. अघोरीयों के शमशान में रहने और मृत इंसान का माँस खाने के पीछे का तर्क भी यही कहता है कि जिस जगह में लोग जाने से डरते है वहाँ पर भी अघोरी बड़ी सहजता से रह लेते है.

अघोरी समान्यत रूप से बेहद ही सरल लोग होते है जो प्रकृति के साथ रहना पसन्द करते है. और न ही उनमें कोई सामाजिक इच्छाए होती है. वे हर चीज को ईश्वर के अंश के रूप में देखते है वह न तो किसी से नफ़रत करते है न ही किसी चीज को ख़ारिज करते है.

अघोरी संप्रदाय का समाजकल्याण में यागदान.

समाज से अलग रहने के बावजूद अघोरी समाजकल्याण के लिए अग्रसर रहते है. फिर वो चाहे लेप्रसी(कोढ़) को रोकने के लिए अस्पतालों का निर्माण हो या फिर किसी के लिए संतान-प्राप्ति का आशीर्वाद ही क्यो न हो. वे किसी को निराश नही करते और न ही इन सब चीजों के लिए पैसे माँगतें है.

अघोरीयों की रहस्यमयी दुनियाँ का “अघोरापंथ”.

अघोरापंथ साधना की एक रहस्यमयी शाखा है. अघोरपंथ का अपना विधान है अपनी अलग विधि है. अघोरपंथ में शमशान साधना का विशेष महत्त्व है. शमशान में साधना करने के पीछे का तर्क कहता है कि, शमशान से ज्यादा शांति कहीं और नही हो सकती.

अघोरपंथ में कोई भी बंदिशे नही होती, इसमें वासना से लेकर माँस खाने तक की अनुमति होती है. बस अघोरी गाय का माँस नही खाते इसके अलावा इंसानी लाश से लेकर जानवर तक के माँस का सेवन करते है.

ऐसा माना जाता है कि कुंभ में आने वाले कई अघोरी साधकों की आयु 100 से 200 वर्ष या इसे भी ज़्यादा हो सकती है. हांलाकि इस बात का अभी तक कोई प्रामाणीक साक्ष्य नही मिला है, पर जानकारों का यही मानना है कि ये रहस्यमयी दुनियाँ अघोरी बाबा सालो की साधना से प्राप्त दिव्य शक्तियों के कारण कई वर्षो तक जीवित रह कर तपस्या करते है.

और जब कुंभ आता है तो अपनी रहस्मयी दुनियाँ से निकल कर कुछ समय के लिए इस भौतिक संसार में कल्याण हेतु कुंभ के पावन पर्व में एकत्रित होते है.

हर कुंभ मेले में अघोरी समुदाये से लाखों अघोरी आते है और समाज कल्याण की मनोकामना के साथ मेला समाप्त होते ही अपनी रहस्यमयी दूनियाँ में वापस चले जाते है.

– मनीषराज शुक्ला की कलम से

 


 

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here